भिया राजनीति की समझ नही होने के कारण आप एसा कह रहै है राजनैतिक मंच पर कुछ भी स्थाई नही होता है यहॉ हमे क्या चाहिए वह स्वयं निश्चिंत करना होता है ओर उसे प्राप्त करने की नीति निर्धारित करनी होती केवल किसी पर दोषारोपण कर के किसी को कुछ नही मिलता शूद्र व आदिवासी समुदाय को जो आरक्षण प्राप्त हो रहा है वह हिंदु समुदाय का विरोध करने के कारण नही वरन् अंबेडकर जी के द्वारा सामुदायिक अधिकार राष्ट्रीय राजनैतिक मंच सिद्ध करने के कारण प्राप्त हुए है हम ओर हमारा नेतृत्व इस विषय मे कोरा है हमारा नेतृत्व विना तैयारी के आरक्षण आरक्षण चिल्लाकर सोच रहै है कि हमे यह मिल जाए भिया यह हमे इन वामसेफ व बी एस पी के भड़काउ लेखो से नही मिलने वाला इसके लिए व्यापक तैयारी ओर संगठन व कुशल नेतृत्व की आवस्यकता है एक बात जान ले बंजारा समुदाय चारो वर्णो से अलग है हमारा व्रह्माण भी इन वर्णो से अलग होता है हमारा वड़तिया भारद्वज ही इस कर्म को करता था हम देश मे मंदिर कुए तालाब बाबड़ी आदि बनाने की परंपरा रही है इसलिए एस सी एस टी वर्ग की अलग अलग समस्या है ओर इनका हल भी अलग तरीके से होगा
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